सपनों का खौफ - भाग 3 Writer: Lucky Thakur अर्पित की धड़कनें तेज़ हो गईं, जैसे हवेली के भीतर हर कदम पर उसका पीछा करने वाला एक अजीब सा साया उसके साथ हो। उसने कागज को कस कर पकड़ा और उस पर लिखे शब्दों को बार-बार पढ़ने लगा। "तुम अपने पूर्वजों की संतान हो, और तुम्हारी आत्मा की शक्ति जागृत हो चुकी है।" ये शब्द उसके दिमाग में गूंज रहे थे। क्या वह वाकई अपनी पहचान से अनजान था? क्या उसका जन्म किसी विशेष उद्देश्य के लिए हुआ था? अर्पित ने संदूक से बाकी चीजों को बाहर निकाला, पर उस कागज के अलावा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं था। कमरे में घना अंधेरा था, और हवेली की खामोशी में उसकी कदमों की आवाज़ गूंज रही थी। अचानक उसके कानों में एक हल्की सी फुसफुसाहट सुनाई दी, जैसे कोई दूर से बात कर रहा हो। उसने अपनी टोर्च की रोशनी को चारों ओर घुमाया, लेकिन कुछ भी नहीं दिखाई दिया। फिर, वह फुसफुसाहट और तेज़ हो गई। वह हल्का सा डरते हुए आवाज़ की ओर बढ़ा। "तुम क्या चाहते हो?" अर्पित ने धीरे से पूछा, जैसे किसी से बात कर रहा हो, लेकिन उसके शब्द हवेली में खो गए। फिर वह अचानक रोशनी के एक बिंदु पर रुका। उसकी नजरें...