"सपनों का खौफ"
Writer: Lucky Thakur
यह कहानी एक छोटे से गांव के एक ऐसे लड़के की है, जिसका नाम था अर्पित। अर्पित एक बहुत ही साधारण लड़का था, जिसे किताबों और पढ़ाई में
बहुत रुचि थी। उसके घर में मुश्किल से ही दो वक्त की रोटी पूरी होती थी, लेकिन वह कभी हार नहीं मानता था। वह जानता था कि उसकी मेहनत उसे किसी न किसी दिन कुछ बड़ा हासिल करने का मौका देगी।
अर्पित के पास एक सपना था। वह हमेशा से ही एक डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन उसके गांव में यह सपना बहुत कठिन था, क्योंकि वहां के लोग जीवन को एक तय रास्ते पर ही चलने की सलाह देते थे। इसके बावजूद, अर्पित ने कभी अपने सपने को छोड़ने का नाम नहीं लिया। वह दिन-रात अपनी पढ़ाई में खोया रहता था और धीरे-धीरे गांव में उसका नाम भी होने लगा।
एक रात, जब अर्पित अपनी किताबों में खोया हुआ था, उसने कुछ अजीब महसूस किया। अचानक, उसकी नजर कमरे की दीवार पर पड़ी, जहाँ कुछ हलचल हो रही थी। उसे लगा कि शायद यह उसकी थकान का असर है, लेकिन फिर उसने देखा कि दीवार में एक अजीब सी आकृति उभर रही थी। अर्पित घबराया, लेकिन उसने अपनी आंखों को चौड़ा करके देखा। आकृति धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही थी और वह एक मनुष्य के चेहरे की तरह दिखने लगी। अर्पित डरते-डरते कमरे से बाहर निकल गया, लेकिन यह दृश्य उसकी आंखों के सामने था, मानो वह पीछा कर रहा हो।
अर्पित ने अगले दिन अपने माता-पिता से इस बारे में बात की, लेकिन उन्होंने इसे उसकी कल्पना और डर बताया। लेकिन अर्पित का दिल यह मानने के लिए तैयार नहीं था। वह जानता था कि वह कुछ असामान्य था, और उसने यह तय किया कि वह इसकी जड़ तक जाएगा। उसकी जिज्ञासा ने उसे फिर से उसी दीवार के पास खड़ा कर दिया। इस बार, वह और भी अधिक दृढ़ था। वह जानता था कि अब उसे अपनी डर को जीतना होगा।
कुछ दिन बाद, अर्पित ने देखा कि वह आकृति केवल रात के समय ही उभरती थी। जैसे ही रात का अंधेरा फैलता, वह फिर से दीवार पर दिखने लगती। एक दिन, अर्पित ने उस आकृति को देख लिया जो अब पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी थी। यह एक महिला का चेहरा था, जिसे देखकर अर्पित का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने तुरंत दीवार के पास जाकर उस आकृति की ओर बढ़ने का फैसला किया। जैसे ही उसने अपनी उंगली दीवार पर छुआ, वह अचानक से चिल्लाई, "तुमने मुझे क्यों देखा?"
अर्पित चौंक गया, लेकिन उसने खुद को संभाला। "तुम कौन हो?" उसने पूछा। महिला ने धीरे से जवाब दिया, "मैं वह हूं, जिसे तुम भूल चुके हो।"
अर्पित की आंखों में और भी भ्रम फैल गया। वह उस महिला को पहचान नहीं पाया। महिला ने फिर से कहा, "तुम्हारे सपने, तुम्हारी मेहनत, सब कुछ तुमसे छीन लिया गया है, क्योंकि तुम्हारे साथ कुछ बहुत पुराना जुड़ा है।" अर्पित यह समझ नहीं पाया, लेकिन वह जानता था कि वह कुछ बहुत गहरी बात पर आ चुका है। उसने और सवाल किए, लेकिन महिला ने कहा, "तुम्हारे आगे एक ऐसा राज़ है, जिसे तुम्हें खुद ही खोलना होगा।"
अर्पित के दिमाग में अनेक सवाल घूम रहे थे। उसकी मेहनत और सपनों के पीछे क्या ऐसा राज़ था जिसे वह नहीं समझ पाया था? क्या यह सब सिर्फ एक सपना था, या फिर यह कोई असली घटना थी? यह सवाल उसके मन को खाए जा रहे थे, लेकिन उसे यह भी महसूस हो रहा था कि अब उसे इस राज़ का खुलासा करना ही होगा।
अर्पित ने महिला से और सवाल किए, "तुम मुझे क्यों छीनना चाहती हो?" महिला ने जवाब दिया, "तुमसे जो लिया गया है, वह मेरा था। तुम मेरी इच्छाओं के परिणाम हो।" महिला के शब्दों में एक दर्द और क्रोध था, जिससे अर्पित का दिल और भी घबराने लगा। उसने महिला से पूछा, "क्या आप मुझे यह सब समझा सकती हो?" महिला ने धीरे से उत्तर दिया, "तुम्हें खुद समझना होगा कि तुम्हारे सपने और तुम्हारी मेहनत के पीछे एक गहरा इतिहास है।"
अर्पित का दिल अब और भी भारी हो गया था। वह अब यह जानने के लिए और भी दृढ़ था कि इस रहस्य का खुलासा कैसे हो। क्या यह महिला उसकी कल्पनाओं का हिस्सा थी, या फिर कुछ और? वह जानता था कि अब इसे जानने का समय आ चुका था।
अर्पित ने सोचा कि यदि वह सच में किसी राज़ से जुड़ा है, तो उसे पहले खुद अपनी जड़ों को समझना होगा। उसने अपने दिमाग में एक ठान लिया कि अब वह किसी भी कीमत पर इस राज़ का पर्दाफाश करेगा। उसने फिर से उस दीवार की ओर बढ़ते हुए महसूस किया कि यह केवल एक शुरुआत है। अब तक जो भी घटनाएं घटी थीं, वह सिर्फ उसके सपनों का हिस्सा थीं।
जैसे ही अर्पित ने अपने कदम बढ़ाए, महिला की आकृति एक बार फिर से दीवार से बाहर निकल आई। इस बार उसने कहा, "तुम अब नहीं बच सकते।" अर्पित ने गहरी सांस ली, और जैसे ही उसने महिला की ओर कदम बढ़ाए, अचानक अंधेरा हो गया और कमरे में एक भयानक चीख गूंजने लगी।
क्या यह चीख सच में अर्पित के सपनों का परिणाम थी, या फिर वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था? क्या वह महिला वास्तव में कोई रहस्यमय शक्ति थी, या फिर अर्पित के आत्मविश्वास का परिणाम था?
कहानी यहाँ खत्म होती है, लेकिन इस राज़ का खुलासा अब भी बाकी है। अर्पित के सफर में आगे और भी रहस्य होंगे, और वह आखिरकार अपने सपनों को हासिल कर पाएगा या नहीं, यह भविष्य में ही पता चलेगा।
मूलकथा: सपने साकार करने के लिए आत्मविश्वास और कठिन मेहनत की जरूरत होती है। कभी-कभी हमारे सामने आ रही चुनौतियाँ हमारे भीतर छिपे हुए राज़ों की ओर इशारा करती हैं। अगर हम अपने डर का सामना करें और सही दिशा में कदम बढ़ाएँ, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।
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