"मनु की लौटती हुई राहें"
लेखक: Lucky Thakur
न्यूयॉर्क सिटी के एक बेहद मशहूर क्वीन रेस्टोरेंट में, गहरे नीले रंग के सूट में एक लड़की बैठी हुई थी, जो बार-बार अपनी निगाहें दरवाजे पर गढ़े हुए थी। उसके पास आधे भरे और आधे खाली पानी के गिलास पर उसका हाथ फिर रहा था। उसकी आंखों में एक अजीब सी उलझन थी, जैसे वह कुछ खोजना चाहती हो, मगर वह ढूंढ़ नहीं पा रही थी। उसे कुछ याद आ रहा था, और शायद उसी यादों के बीच वह खो चुकी थी।
तभी अचानक उसके फोन की घंटी बजी। उसने देखा और फोन उठाते हुए कहा, "हैलो..." दूसरी तरफ से आवाज आई, "मनु..."
"जी दादा..." उसने हल्की सी आवाज में जवाब दिया।
"कैसी हो?" उधर से आवाज आई।
"ठीक हूँ दादा... आप कैसे हैं?" मनु ने कहा, मगर उसके चेहरे पर एक उदासी छाई हुई थी।
"मनु, तुझे आना होगा। पापा की तबियत ठीक नहीं है, वो तुझे बहुत याद कर रहे हैं।" अतुल दादा की आवाज में हल्का सा घबराहट था।
यह सुनकर मनु के चेहरे पर उदासी और आंसू आ गए। उसकी आंखें अचानक से भीग गईं।
"मनु, तुम सुन रही हो ना? मनु..." अतुल ने फिर से कहा।
"हाँ, दादा..." उसने धीरे से कहा।
"तुम्हारी फ्लाइट की टिकट मैंने करा दी है, कल की है। अभी मैंने मेल की है।"
"दादा, मैं..." मनु के मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे।
"मनु..." इस बार फोन के दूसरी तरफ कोई और बोला।
"माँ..." मनु ने गले में आकर कहा, उसकी आवाज भारी थी।
"कैसी है मेरी बच्ची?" माँ की आवाज में ममता थी।
मनु का गला रुंध गया, वह कुछ भी बोलने की कोशिश करती रही, मगर उसकी आवाज साथ नहीं दे रही थी। आंसू उसकी आंखों से बह रहे थे, और उसे बहुत मुश्कल से कहा, "ठीक हूँ... आप?"
"यहां कुछ भी ठीक नहीं है... वापस आ जा मेरी बच्ची।" माँ के शब्दों में कुछ ऐसा था कि मनु की आत्मा तक हिल गई।
मनु हिचकते हुए बोली, "हम्म..."
"मनु... मैं भेज दूंगा शिव को लेने और चलते वक्त फोन करना।" माँ ने अंतिम शब्द कहे।
"हम्म..." मनु ने सिर्फ इतना कहा, और फिर फोन कट हो गया।
मनु की आँखों में एक गहरी उदासी थी, जैसे वह कहीं खो गई हो। उसने एक पल के लिए सब कुछ भूलने की कोशिश की, लेकिन उस पल में उसे अपने घर, अपने परिवार और सबसे बढ़कर अपनी माँ और पापा की यादें बहुत ताकत से खींच रही थीं।
मनु ने अचानक किसी को फोन किया। फिर उसने वेटर को बुलाया।
वेटर आया तो मनु ने कहा, "आई हैव सम अर्जेंट वर्क टू डू... आई हैव टू... सो आई डिड नॉट ऑर्डर एनीथिंग।"
"ओके मैम... नो प्रॉब्लम," वेटर ने विनम्रता से कहा।
मनु ने गहरी साँस ली और एक पल के लिए खामोशी में डूब गई। उसकी आँखों में स्पष्ट था कि वह मानसिक रूप से कहीं और थी, उसे एक चीज़ महसूस हो रही थी - घर की यादें, उसके परिवार की प्यार भरी बातें, और वह अजीब सी बेचैनी, जो कभी भी उसे अपने घर से दूर जाने पर होती थी।
कहानी का संदेश:
यह कहानी एक लड़की की है, जो अपने परिवार से दूर है, और किसी भी वक्त अपने परिवार के पास लौटने की चाहत में है। यह हमें यह सिखाती है कि चाहे हम कितनी भी दूर क्यों न हो जाएं, घर और परिवार की यादें हमेशा हमारे दिल में रहती हैं। जीवन की राह में हमें कुछ भी खोने का डर होता है, लेकिन परिवार और अपनों के साथ बिताए गए पल हमेशा हमें वापस बुलाते हैं।
मनु की स्थिति यह बताती है कि जीवन की भागदौड़ में भी कभी-कभी हमें अपने परिवार और घर की यादें और उनकी अहमियत समझनी चाहिए।
Moral of the Story:
"घर की यादें और परिवार का प्यार हमारे जीवन का सबसे अहम हिस्सा होते हैं। जहां भी हम जाएं, अपनों का प्यार हमेशा हमारे साथ रहता है।"

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