"ब्रेकअप की रात और एक शरारती मुस्कान"
लेखक: लकी ठाकुर
रीटा और मैं एक स्टैंडिंग टेबल के पास खड़े-खड़े आइसक्रीम का आनंद ले रहे थे। हम दोनों की आंखों में हल्की सी शरारत और एक दूसरे के लिए जो प्यार था, वह हमें थोड़ा और करीब ले आता था। तभी अचानक, रीटा ने बात शुरू की, "कल क्या हो गया था आपको?"
"कल..कब?" मैंने अचरज से उसकी ओर देखा।
"अरे यार! कल शाम फाउंटेन पार्क में तुझे कौन सा जूड़ी बुखार आ गया था, जो ब्रेकअप माँग रहा था मुझसे?" उसने थोड़े झुँझलाते हुए कहा।
मेरे चेहरे पर घबराहट साफ दिखी। "शाम को फाउंटेन पार्क... ब्रेकअप... यह क्या कह रही हो?" मैंने बच्चे जैसी मासूमियत से कहा, जैसे मैं सच में कुछ समझ ही नहीं पा रहा था।
"यार! तू फिर से शुरू हो गया न!" वह झुँझला कर दोनों हाथों से अपने बाल नोचने लगी, फिर अपना सिर पकड़ कर कोहनियों को मेज पर टिका दिया। कुछ देर रुककर उसने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुरा पड़ी और बोली, "यस, दैट्स इट! सच्ची में... प्रेम के भारी पलों को भुला देने का यह हुनर मुझे भी सीखना है आपसे। बढ़िया।"
"अच्छा.. वो देखो! एक लड़की की ड्रेस कितनी अच्छी है।" उसने मेरे पीछे इशारा करते हुए कहा।
मैंने शरारत से उसकी ओर देखा और फिर नज़रे घुमाते हुए कहा, "मुझे तुम्हारे सिवा कोई लड़की नहीं दिखती। मुझे नहीं देखना।"
रीटा की आंखों में झलकती हुई मुस्कान मुझे साफ समझा रही थी कि वह फिर से मेरी चतुराई को पकड़ चुकी थी। वह हमेशा की तरह मेरी चतुराई से हंसते हुए कहती, "तुम हमेशा ऐसा ही करते हो, लेकिन तुम जानते हो, इस बार मैं तुम्हारी चाल नहीं आने दूँगी।"
मुझे अच्छा लगा, वह अब भी मेरी शरारतों से उतनी ही प्यार करती थी, जितना पहले करती थी। लेकिन यह भी था कि रीटा को बहुत अच्छे से पता था कि मैं कभी न कभी कुछ ऐसा कर दूँगा जिससे वह मुस्कराते हुए फिर से मेरी चतुराई पर हंस पड़ेगी।
तभी हम दोनों कुछ देर के लिए चुप हो गए। मैं उसकी बातों में खो चुका था और वह मेरी चुप्पी का कारण समझने की कोशिश कर रही थी। उसकी शरारत भरी मुस्कान और मेरा दिल फिर से वही पुरानी बातों से गूंज उठा।
वो पुराने दिन याद आ गए, जब हम दोनों बिना किसी चिंता के एक दूसरे के साथ समय बिताते थे। अब रिश्तों में थोडा और पकापन आ गया था। हालांकि कभी-कभी हम दोनों के बीच छोटे-मोटे मतभेद भी होते थे, लेकिन यही वो चीज़ें थीं जो हमारे रिश्ते को मजबूत बनाती थीं।
"तुम्हें पता है, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।" उसने धीरे से कहा, "और यह सब तुम्हारी इन चतुराई भरी बातों की वजह से है।"
"मैं भी तुमसे उतना ही प्यार करता हूँ, लेकिन ब्रेकअप की बात छोड़ो। मुझे कुछ भी याद नहीं आ रहा।" मैंने उसे चिढ़ाते हुए कहा।
उसकी आँखों में फिर से वही शरारत थी। "तुमसे क्या छिपाना, तुम हर बार इस तरह से बातें बनाते हो कि मुझे बस हंसी आ जाती है। तुम्हारे बिना तो कुछ भी अधूरा सा लगता है।"
उसकी बातों ने मेरे दिल को छू लिया, और हम दोनों हंसी में डूब गए। कुछ पल के लिए यह चाँदनी रात और आइसक्रीम की स्टैंडिंग टेबल हमें और दुनिया से परे ले गई।
मोरल:
यह छोटी सी कहानी यह सिखाती है कि रिश्तों में प्यार और समझदारी से ही समस्याओं को हल किया जा सकता है। थोड़ी शरारत और हल्की-फुल्की चिढ़ाई रिश्ते को नया जोश देती है, लेकिन सबसे ज़रूरी है एक दूसरे का ख्याल और सम्मान।
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अगली कहानी में जानें "रिश्तों में छोटे-छोटे झगड़े और सुलझाने के तरीके"!

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