"रिश्तों के बीच की दरार"
"अरे, आज इस समय दीदी का फोन... वो तो कभी वक्त बेवक्त फोन करती नहीं है, फिर.. सब ठीक तो है ना?" अनेक आशंकाओं के मध्य श्रुति ने धीरे से कहा।
"हां दीदी, बोलिए... क्या कर रही है?" श्रुति ने फोन उठाते हुए कहा।
"आज मैंने इस समय फोन लगा लिया है... तू फ्री तो है ना?" दीदी की आवाज़ में कुछ गंभीरता थी, जो श्रुति ने महसूस की।
"हां दीदी, आप बोलिए ना..." श्रुति ने कुछ घबराई हुई आवाज़ में कहा, क्योंकि दीदी का इस समय फोन आना सामान्य नहीं था।
माँ-बाबूजी के जाने के बाद दीदी ने माँ की भूमिका पूरी तरह से निभा ली थी। अच्छे-बुरे, दुख-सुख में हमेशा वह श्रुति के साथ रहतीं। श्रुति भी तो, एक दीदी ही थी जिनसे मन की बातें करती थी।
लेकिन आज जो दीदी ने कहा, वह कुछ अजीब सा था। दीदी ने जो कुछ कहा, वह गहरे सोचने की बात थी, और श्रुति समझ रही थी कि यह कोई सामान्य बातचीत नहीं होने वाली है।
"वो क्या है ना श्रुति," दीदी की आवाज़ में एक हलकी सी घबराहट थी। "माना तू साफ दिल की है, स्पष्ट वादी है। मुँह के सामने अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहने की साहस भी रखती है... पर कभी-कभी ज्यादा स्पष्ट वादी रिश्तों में दरार पैदा कर देती है।"
श्रुति को समझ में आ गया कि दीदी किसी गंभीर बात को लेकर परेशान थीं।
"हां दीदी, मैं जानती हूं," श्रुति ने तसल्ली देते हुए कहा, "पर बात क्या है आप साफ-साफ बताइए ना..."
"बताती हूं बहन," दीदी की आवाज़ में गहरी निःशब्दता थी, "पर तू पूछा-पाछी मत करना और मैंने तुझे जो भी बताया है, ये किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए, खासकर भाभी को..."
"ठीक है दीदी, लेकिन बात तो बताइए," श्रुति की उत्सुकता अब बढ़ चुकी थी।
श्रुति के मन में ढेर सारी सवाल उठ रहे थे। दीदी का ऐसा कहना, खासकर भाभी को लेकर, कुछ और ही कहानी की ओर इशारा कर रहा था। वह सोच रही थी कि आखिर दीदी को क्या परेशानी हो सकती है, क्यों दीदी को इतना घबराहट महसूस हो रही थी।
कुछ पल की चुप्पी के बाद, दीदी ने धीरे से कहा, "तुझे याद है न कि पिछले कुछ दिनों से भाभी की तबियत ठीक नहीं चल रही थी, और उन्होंने मुझसे मदद मांगी थी?"
श्रुति ने हां में सिर हिलाया। भाभी की तबियत ठीक नहीं थी, यह तो वह भी जानती थी, लेकिन यह बात तो बहुत सामान्य सी थी। फिर दीदी को इसमें घबराने की क्या बात थी?
"मैंने उनकी मदद की, मगर कुछ ऐसा हुआ जो मैं तुझसे शेयर नहीं करना चाहती थी... पर अब सोचती हूं कि तुझे बताना ही चाहिए," दीदी ने गहरी साँस लेते हुए कहा।
श्रुति को अब डर सा लगने लगा था। "क्या हुआ दीदी?" उसकी आवाज़ में चिंता साफ थी।
"तू जानती है न कि भाभी के पास हमेशा पैसे की कमी रहती है, और मैंने अपनी तरफ से उनकी मदद की थी... लेकिन कुछ दिनों पहले मैंने देखा कि भाभी का व्यवहार बहुत अजीब हो गया था। वह मेरे साथ बातचीत में बहुत उलझी हुई थीं और कुछ छुपाने की कोशिश कर रही थीं। कुछ और ऐसा था जो वह मुझे नहीं बता रही थीं... मुझे शक हुआ, और मैंने खुद जाकर उनके कमरे की सफाई की।"
श्रुति की आँखे फैल गईं, "क्या...क्या हुआ दीदी? आप क्या कह रही हैं?"
"उन्होंने किसी से पैसा लिया था, और वह पैसा उनकी उधारी की वजह से था। यह बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि भाभी ने कभी मुझसे इस बारे में कुछ नहीं कहा। उन्होंने मुझसे जो पैसा लिया था, वह सच्चाई से काफी दूर था। अब मुझे लगता है कि भाभी ने कुछ गलत किया है और वह हमें नहीं बताना चाहती हैं।"
श्रुति का मन घबराया हुआ था। यह क्या था? क्या दीदी सच कह रही थीं? क्या भाभी ने सच में ऐसा कुछ किया था जो परिवार में छुपाना पड़ा था?
"दीदी, यह बहुत मुश्किल बात है... क्या आपको लगता है कि यह सच है?" श्रुति ने डरते हुए पूछा।
"मुझे नहीं पता," दीदी ने सिर झुका लिया। "पर अब मुझे यह पता चला कि वह हमें धोखा दे रही थीं। और मैं नहीं चाहती कि तू भी इस चीज़ से अनजान रहे। हमें सब कुछ साफ-साफ पता होना चाहिए। अगर उन्होंने गलत किया है, तो हम सबको एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। रिश्तों में यह छुपाना सही नहीं है।"
श्रुति अब पूरी तरह से चौंकी हुई थी। यह ऐसा मामला था जिसे वह कभी नहीं सोचना चाहती थी। क्या भाभी ने सच में कुछ गलत किया था?
"दीदी, मुझे यह सब बहुत मुश्किल लग रहा है," श्रुति ने कहा। "अगर यह सब सच है, तो हमें इसे बहुत सोच-समझकर संभालना होगा। हम किसी को भी दोष नहीं दे सकते, पर हमें यह समझना होगा कि हमें अपने रिश्ते कितने मजबूत तरीके से निभाने हैं।"
दीदी चुप हो गईं। यह सच था कि रिश्तों में बहुत सी बातें होती हैं जो बाहर नहीं आतीं, लेकिन कभी कभी सच्चाई सामने आ ही जाती है, और जब यह सामने आती है, तो दिल में एक गहरी खाई बन जाती है।
श्रुति को अब यह अहसास हो रहा था कि रिश्तों को कैसे संभालना चाहिए, और कैसे सही वक्त पर, सही कदम उठाना जरूरी है।
मोरल:
रिश्तों में खुलकर बातें करना जरूरी होता है, लेकिन कभी-कभी हमें यह समझना भी होता है कि कुछ बातें सामने लाने से रिश्तों में दरार भी आ सकती है। हर फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।
लेखक: Lucky Thakur

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