Skip to main content

अदिति की नई पहचान - भाग 2

अदिति की नई पहचान - भाग 2
Written by Lucky Thakur



अदिति के जीवन में अब तक जो घटनाएँ घटीं, वे उसे न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी चुनौती दे रही थीं। एक अजनबी कॉल, एक रहस्यमय चेतावनी, और अब वह खुद को एक नए सफर पर कदम रखने के लिए तैयार महसूस कर रही थी। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था। उसकी जिंदगी में एक और मोड़ आने वाला था, जो उसकी पहचान को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

क्या अदिति अपने भविष्य को इस रहस्यमय रहस्य से बाहर निकल कर संजो पाएगी? क्या वह उस दिशा में सही कदम उठा पाएगी, जहां उसे अपनी पूरी पहचान का अहसास हो सके? और क्या वह उस खतरे से बच पाएगी, जो छिपा हुआ था?

शुरू होती है एक नई तलाश

अदिति ने ठान लिया था कि अब वह अपनी पहचान को सही तरीके से समझेगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि सब कुछ आसान होगा। एक अजनबी कॉल से शुरू होकर, अब उसे यह समझ में आ चुका था कि यह सब उसके जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका था। उसे अपनी खुद की पहचान को न सिर्फ समझना था, बल्कि उसे पूरी दुनिया के सामने भी लाना था।

वह घर के एक कोने में बैठी थी, अपने जीवन के पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर विचार कर रही थी। हर दिन उसे एक नई दिशा, एक नई राह पर ले जा रहा था। लेकिन वह पूरी तरह से अनिश्चित थी कि वह किस रास्ते पर जा रही थी।

एक अनजान मोड़

अदिति की जिंदगी में एक और बदलाव आया था। अब वह खुद को सिर्फ एक शिक्षिका के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देख रही थी, जो अपने भविष्य के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। लेकिन यह कदम केवल उसके लिए नहीं था, बल्कि उसकी पूरी जिंदगी के लिए था।

एक दिन, जब अदिति स्कूल से वापस आ रही थी, उसका सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ, जिसने उसकी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया। वह व्यक्ति उसकी पहचान के बारे में कुछ ऐसा जानता था, जो अदिति के लिए पूरी तरह से नया था।

"तुम अदिति हो, ना?" उस व्यक्ति ने एक कड़ी नजर से देखा।

"जी, मैं अदिति हूं। आप कौन हैं?" अदिति ने अपनी आवाज में संकोच और चुपके से डर की भावना महसूस की।

"तुम्हारे बारे में बहुत कुछ सुना है, और तुम्हारे सामने जो चुनौती है, वह बड़ी नहीं, बल्कि बेहद महत्वपूर्ण है।" उस व्यक्ति ने कहा।

"कौन सी चुनौती?" अदिति ने थोड़ा सा घबराया, लेकिन उस व्यक्ति के चेहरे पर कोई भावनाएं नहीं थीं। वह शांत था, लेकिन उसकी आँखों में एक गहरी चेतावनी थी।

"तुमने सही रास्ते का चुनाव किया है, लेकिन तुम केवल शुरुआत कर रही हो। तुम्हारे पास जो शक्ति है, उसे पहचानो। तुम्हारी पहचान सिर्फ तुम्हारे चेहरे और रूप से नहीं, बल्कि उस अनदेखी शक्ति से है, जो तुम्हारे अंदर बसी है।" उस व्यक्ति ने कहा और फिर उसकी नजरें अदिति से हटीं।

अदिति चुपचाप खड़ी रही, सोचते हुए कि आखिर यह व्यक्ति क्या कह रहा है। क्या सच में उसके अंदर कोई शक्ति है, जिसे वह पहचान नहीं पाई थी? और अगर है तो क्या वह इसका सही इस्तेमाल कर पाएगी?

एक रहस्य की ओर

अदिति का मन अभी भी उस अजनबी के शब्दों पर उलझा हुआ था। क्या सच में उसके अंदर कुछ ऐसा था, जिसे वह अब तक नहीं समझ पाई थी? क्या वह किसी खास पहचान की ओर बढ़ रही थी?

उस रात, अदिति ने कुछ और सोचने की कोशिश की। उसने अपनी किताबों को देखा, अपनी शिक्षा के बारे में सोचा, और फिर अपने भीतर झांकने का प्रयास किया। क्या वह सच में किसी और रूप में खुद को पहचानने वाली थी? क्या वह कुछ ऐसा करने जा रही थी, जो न सिर्फ उसके लिए बल्कि दूसरों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता था?

लेकिन जितना ही वह इस पर विचार करती, उतना ही यह रहस्य गहरा होता जाता। और उसके दिमाग में एक सवाल बार-बार गूंज रहा था - "क्या अगर यह सब सच है?"

एक नया संकेत

अदिति के लिए यह सफर एक नए मोड़ पर आ खड़ा हुआ था। कुछ दिनों बाद, उसे फिर से एक कॉल आई। लेकिन इस बार वह कॉल उससे कहीं ज्यादा डरावनी थी। कॉल पर वही अजनबी आवाज थी।

"तुम अब उस रास्ते पर चल पड़ी हो, अदिति। यह समय आ चुका है कि तुम पूरी तरह से तैयार हो जाओ। तुम्हारी पहचान अब एक नई दिशा में जाएगी, और तुम्हें एक अहम निर्णय लेना होगा।" उस व्यक्ति की आवाज में घबराहट थी, जैसे वह कुछ अहम बातें बताना चाह रहा हो, लेकिन वह पूरी तरह से साफ नहीं था।

"कैसा निर्णय?" अदिति ने घबराकर पूछा।

"तुम्हारे सामने दो रास्ते हैं। एक वह, जहां तुम अपनी पहचान को पहचानने के बाद अपनी पूरी दुनिया को बदल सकती हो। और दूसरा वह, जहां तुम अपने वर्तमान में ही रहकर संतुष्ट हो सकती हो। लेकिन तुम जो भी चुनोगी, तुम्हें उसकी पूरी कीमत चुकानी होगी।" वह व्यक्ति फिर से चुप हो गया।

अदिति की धड़कन तेज हो गई। उसने सोचा कि इस रहस्यमय आवाज का क्या मतलब हो सकता है? क्या यह संकेत था कि उसे एक बड़ा कदम उठाने का समय आ चुका था? लेकिन वह किसे चुने? क्या उसे अपनी पहचान बदलने का साहस जुटाना चाहिए, या फिर अपने वर्तमान में ही संतुष्ट रहना चाहिए?

वास्तविकता की ओर कदम

अदिति ने तय किया कि अब वह इस रहस्य का पर्दाफाश करेगी। वह किसी और के विचारों और डर के बजाय अपनी खुद की पहचान के बारे में सोचने लगी। और इस बार उसने अपने आत्मविश्वास को पूरी तरह से जागृत किया।

वह अपने भीतर झांकने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। उसने महसूस किया कि अपनी पहचान को समझने के लिए, उसे अपने डर और संकोच को छोड़ना होगा। वह किसी और के द्वारा तय की गई पहचान को छोड़, अपनी खुद की पहचान को अपनाएगी।

उसने यह तय किया कि वह अब अपनी जिंदगी के हर पहलू को नया रूप देगी, और उन सभी सवालों का जवाब ढूंढेगी, जो उसके मन में थे।

अगले कदम की ओर

अदिति अब तैयार थी। वह अपने जीवन में एक नया अध्याय शुरू करने जा रही थी। क्या वह अपनी असली पहचान पा सकेगी? क्या वह उस नए रास्ते पर चलकर अपनी पूरी दुनिया बदल पाएगी?

अदिति के मन में ये सारे सवाल थे, और इस समय उसके भीतर एक अजीब सी उत्सुकता और डर था। लेकिन वह जानती थी कि इस सफर को तय करने के लिए उसे खुद को पूरी तरह से तैयार करना होगा। और वह किसी भी कीमत पर इस रहस्य का सामना करेगी, चाहे जो भी हो।


Read Next Story

Read Next Story

Comments

Popular posts from this blog

ससुर का आशीर्वाद: एक चश्मे की कहानी"

  "ससुर का आशीर्वाद: एक चश्मे की कहानी" Written by Lucky Thakur   मैं एक नई बहू थी, और एक प्राइवेट बैंक में अच्छे ओहदे पर काम करती थी। मेरी सास को गुज़रे हुए एक साल हो चुका था, और घर में मेरे ससुर और पति के अलावा कोई और नहीं था। मेरे पति का अपना कारोबार था, जिसके कारण वह हमेशा व्यस्त रहते थे। हमें कभी-कभी ही एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलता था, और जब भी हम समय साथ बिताने की कोशिश करते, तो कुछ न कुछ समस्या आ ही जाती। कभी मेरे ससुर जी आवाज़ दे देते थे, कभी कोई और काम आ जाता। हर सुबह जब मैं जल्दी-जल्दी घर का काम निपटाकर ऑफिस के लिए निकलने की तैयारी करती, ठीक उसी वक़्त मेरे ससुर मुझे आवाज़ देकर कहते, "बहू, मेरा चश्मा साफ़ कर मुझे देती जा।" यह एक रोज़ का सिलसिला बन चुका था। ऑफिस जाने की जल्दबाजी और काम के दबाव के कारण मैं कभी-कभी मन ही मन झल्ला जाती, लेकिन फिर भी अपने ससुर को कुछ कह नहीं पाती थी। एक दिन, मैंने इस बारे में अपने पति से बात की। उन्हें यह सुनकर थोड़ी हैरानी हुई, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने मुझे एक सलाह दी कि, "देखो, सुबह उठ...

सपनों का खौफ - भाग 10

सपनों का खौफ - भाग 10 Writer: Lucky Thakur अर्पित ने जो यात्रा शुरू की थी, वह अब अपने एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी थी। उसने गुफा से बाहर निकलते ही एक नई दुनिया का सामना किया, जिसमें अद्भुत पहाड़, हरे-भरे वन और सर्द हवा बह रही थी। यह दृश्य उसे एक अजीब सा लग रहा था, जैसे वह एक पूरी नई दुनिया में कदम रख चुका था, जहां सब कुछ अनजाना था। हालांकि, उसने भीतर एक अजीब सा डर महसूस किया, जैसे यह दुनिया किसी गहरे रहस्य से जुड़ी हो। "यह दुनिया क्या है?" अर्पित ने खुद से पूछा। लेकिन उसका मन शांत था, क्योंकि वह जानता था कि उसकी आंतरिक शक्ति अब पूरी तरह से जागृत हो चुकी थी। वह जान चुका था कि जो कुछ भी सामने आएगा, वह उसका सामना करने के लिए तैयार था। अर्पित ने आसपास देखा। वहां एक छोटा सा गांव नजर आ रहा था। लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे, लेकिन कुछ अजीब सी शांति और थकान का अहसास उनकी आँखों में था। ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ गंभीर समस्या का सामना कर रहे हों, लेकिन वह खुलकर कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। अर्पित को देखते ही गांव के एक वृद्ध व्यक्ति ने उसकी ओर इशारा किया। वह व्यक्ति धीरे-धीरे...

सपनों का खौफ - भाग 6

सपनों का खौफ - भाग 6 Writer: Lucky Thakur अर्पित ने जैसे ही दरवाजा खोला, उसके सामने एक विशाल और अंधेरी गुफा थी, जिसका कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा था। गुफा की दीवारें पर अजीब सी उकेरी हुई लकीरें और प्रतीक बने हुए थे। यह प्रतीक वही थे जो किताब में थे, और अब अर्पित को पूरी तरह से समझ में आ गया था कि यह जगह जितनी खतरनाक है, उतनी ही महत्वपूर्ण भी है। यहाँ वह शख्स छुपा हुआ था, जिसे वह ढूंढ़ रहा था। वह धीरे-धीरे गुफा में कदम रखता गया। हर कदम के साथ, उसे यह एहसास हो रहा था कि उसकी शक्ति अब उसके साथ है, लेकिन उसकी शक्ति का सही उपयोग करना कितना कठिन हो सकता है, यह वह नहीं जानता था। जैसे ही वह गुफा के और अंदर बढ़ा, एक तेज़ और तीव्र आवाज़ सुनाई दी, जो उसके कानों के पास गूंज रही थी। "तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" एक गहरी आवाज़ ने उसे चौंका दिया। अर्पित ने तुरंत मुड़कर देखा, और देखा कि सामने एक छायामय व्यक्ति खड़ा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, और उसकी आँखों से क्रूरता टपक रही थी। यह वही आदमी था, जिसकी तलाश अर्पित कर रहा था। वह वही जादूगर था, जिसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया था और अब दुन...

"एक यादगार सफर: अविनाश और आराध्या की कहानी"

  "एक यादगार सफर: अविनाश और आराध्या की कहानी" Written by: Lucky Thakur कहानी की शुरुआत: आज जब मैं उसी स्कूल के पास से गुजर रहा था, जहां मेरे जीवन का सबसे अहम मोड़ आया था, तब अचानक मेरे मन में एक हलचल सी मच गई। वो स्कूल, वो गलियाँ, वही पुराने अहसास, सब कुछ जैसे आज भी वैसे ही था। और फिर मुझे याद आई आराध्या, वह लम्हे जब हमारी दोस्ती ने प्यार का रूप लिया था। जैसे ही मैं उस जगह के पास से गुजरा, मेरी आँखों के सामने वो सारी यादें ताजा हो गईं। ऐसा लगा जैसे वह समय फिर से मेरे पास लौट आया हो, और मैं उन बीते हुए लम्हों को फिर से जीने लगा। मेरा नाम अविनाश है। आराध्या के साथ शुरू हुआ हमारा सफर आज भी मेरे दिल में बसा हुआ है। मुझे वह दिन आज भी याद है, जब आराध्या ने उस सफ़ेद कुर्ते में खूबसूरती से लाइब्रेरी से बाहर कदम रखा। उसकी लम्बी बालियां और एक हाथ में घड़ी और दूसरे हाथ में किताबें थीं। उसका चेहरा, उसके घुंघराले बाल, और उस पर बिखरी मुस्कान – मैं बस वहीं खड़ा, अपनी साइकिल पर बैठा, उसे देखता रह गया था। वह दिन सच में मेरे जीवन का एक नया मोड़ था। वह हम दोनों का साथ में होने का पहला दिन था। ह...

"छोटे से शहर की बड़ी उम्मीदें"

 "छोटे से शहर की बड़ी उम्मीदें" Writer Name: Lucky Thakur उस दिन मौसम कुछ अलग सा था। आसमान में हल्की सी धुंध थी, और हवा में एक अनजानी सी ठंडक महसूस हो रही थी। सोना, जो एक छोटे से गांव की साधारण सी लड़की थी, अपने सपनों को लेकर हमेशा उत्साहित रहती थी, आज भी कुछ खास महसूस कर रही थी। उसका दिल धड़क रहा था क्योंकि उसे पता था कि आज का दिन उसके लिए कुछ बड़ा लाने वाला था। सपने देखना अब उसे आदत बन चुकी थी। यह उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था—बड़े शहर जाने का सपना, बड़ी नौकरी पाने का सपना, और सबसे महत्वपूर्ण, अपने परिवार की तकलीफों को दूर करने का सपना। लेकिन अब, सोना के सामने एक बड़ा फैसला था। क्या वह अपने छोटे से गांव को छोड़कर शहर में अपनी नई जिंदगी शुरू करेगी, या फिर उसी पुरानी दुनिया में रहकर संतुष्ट हो जाएगी? यह सवाल उसे परेशान कर रहा था। उसके परिवार की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी। उसके पिता एक छोटे से किराने की दुकान चलाते थे, और मां घर का कामकाज संभालती थीं। सोना को हमेशा से ही यह एहसास था कि उसे अपने परिवार की मदद करनी होगी, लेकिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए, उसे अपने घर और ...

"होटल का रहस्य: रूम नंबर 5-6 का डरावना सच"

 "होटल का रहस्य: रूम नंबर 5-6 का डरावना सच" Written by Lucky Thakur एक ठंडी रात में, एक अजनबी आदमी शहर के एक पुराने होटल में रुका। होटल का माहौल थोड़ी उदासी में डूबा हुआ था, लेकिन यह आदमी किसी भी हालात में ठहरने के लिए तैयार था। उसने होटल के मैनेजर से पूछा, "क्या रूम नंबर 5-6 खाली है?" मैनेजर ने तसल्ली से जवाब दिया, "जी हां, रूम नंबर 5-6 खाली है। आप उसे ले सकते हैं।" आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, मुझे एक चाकू, तीन इंच का काला धागा और 7 से 9 ग्राम का संतरा चाहिए।" मैनेजर थोड़ी चौंका, लेकिन उसने बिना किसी सवाल के सब कुछ तैयार करने का वादा किया। "अच्छा, और एक बात," मैनेजर ने कहा, "मेरा कमरा आपके कमरे के ठीक सामने है। अगर आपको कोई परेशानी हो, तो आप मुझे आवाज दे सकते हैं।" आदमी ने सिर हिलाया और रूम की ओर बढ़ गया। रात का वक्त आया, और अचानक रूम नंबर 5-6 से चीखने की आवाजें आने लगीं। आवाजें इतनी तेज थीं कि होटल का मैनेजर नींद से जाग गया। वह बेचैन हो गया। क्या हो रहा था? क्या यह सिर्फ उसका भ्रम था, या सच में कुछ खौ़फनाक हो रहा था...

"रहस्यमयी किताब - भाग 3"

  "रहस्यमयी किताब - भाग 3" Writer: Lucky Thakur मयंक की आँखों के सामने घना अंधेरा था, जैसे वह किसी रहस्यमयी दुनिया में कदम रख चुका हो, जहाँ न कोई रास्ता था, न कोई दिशा। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। चारों ओर सन्नाटा था, बस एक गहरी खामोशी पसरी हुई थी। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह किस जगह आ गया था। हवा में एक ठंडी, विचित्र सी महक थी। अचानक उसे महसूस हुआ कि वह अकेला नहीं था। कुछ छिपा हुआ था, जो उसकी हर हरकत पर नजर रखे हुए था। "क्या तुम तैयार हो, मयंक?" वह आवाज फिर से आई, जो पहले उसे किताब में सुनाई दी थी। यह आवाज अब और करीब महसूस हो रही थी, जैसे वह उसके कानों में ही गूंज रही हो। मयंक ने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। "तुमने जो किताब पढ़ी थी, वह सिर्फ एक शुरुआत थी," आवाज और भी गहरी हो गई, "अब तुम्हें अपनी पहचान का असली सच जानना होगा।" मयंक को समझ में आ गया कि वह किसी ऐसे जगह में है जहाँ वह खुद को खो चुका था, और अब उसे खुद के बारे में कुछ गहरे राज़ जानने थे। लेकिन वह डर भी महसूस कर रहा था। क्या वह सच में अपनी पहचान जानने के लिए तैयार था? उसने...

"माँ की हिम्मत और बच्चों से प्यार"

  "माँ की हिम्मत और बच्चों से प्यार" Written by Lucky Thakur Category: Moral Stories in Hindi Read Next Story कुछ दिन पहले जो महिला दुकान पर आई थी, उसकी बातें मेरी यादों में गहरे तक समाई हुई थीं। वह अकेली खड़ी थी, और हमें समझ में आ रहा था कि उसकी परेशानियाँ सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि दिल से जुड़ी हुई थीं। हालांकि उस दिन उसकी आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी, अब कुछ दिन बाद उसकी हालत बदल चुकी थी। वह अब पहले से शांत और खुश दिखाई दे रही थी। "क्या हाल हैं माँ जी?" मैंने फिर से उसके पास जाकर पूछा। वह हल्की सी मुस्कान के साथ बोली, "बिलकुल ठीक हूं बेटा। अब मुझे समझ में आ गया है कि किसी भी चीज़ को बदलने के बजाय हमें उसे अपनाना चाहिए। पहले बच्चों के साथ बिताए समय को लेकर बहुत परेशान थी। सोचती थी, अगर वे न आए तो क्या होगा। अब समझने लगी हूं कि ये सब समय का हिस्सा हैं।" उसकी बातों में एक गहरी सुकून थी। मैं और भाई एक-दूसरे को देख रहे थे, जैसे यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि उस महिला ने अपने दर्द को कैसे सहेजा। उसने बहुत कुछ खोया था, लेकिन अब उसे समझ में आ गया था कि जो कुछ भी...

"रौनी और रोमा की उलझन भरी प्रेम कहानी"

 "रौनी और रोमा की उलझन भरी प्रेम कहानी" Written by: Lucky Thakur Story: सुबह का समय था, और रोमा घर का काम जल्दी-जल्दी निपटा कर दौड़ती हुई जा रही थी। इसी बीच, वनिता ने उसे आवाज लगाई, "रोमा, नाश्ता कर ले, मैंने तेरे लिए रखा है।" रोमा जल्दी से जवाब देती हुई बोली, "रख दीजिए बीबीजी, मुझे बहुत जरूरी काम है, शाम को वापस आकर खा लूंगी।" यह कहकर वह तेज़ी से घर से बाहर निकल पड़ी। वह सोसाइटी के कुछ घरों में सफाई का काम करती थी, और आज वह अपने प्रेमी रौनी से मिलने के लिए बड़ी ही जल्दी में थी। रौनी, जो कि बगल वाली सोसाइटी में मिस्टर मेहरा के घर ड्राइवर था, के साथ उसकी मुलाकात पिछले दो साल से थी। एक दिन, जब दोनों एक-दूसरे से अनजाने में टकराए थे, तो यहीं से उनकी दोस्ती और फिर प्यार का सिलसिला शुरू हुआ था। रोमा, एक बेहद सुंदर और आकर्षक लड़की थी, जिसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। उसकी हँसी में दिल को छूने वाली मासूमियत थी, और वह अपने काम में पूरी लगन से जुटी रहती थी। लेकिन उसे रौनी के साथ भविष्य की उम्मीदें थीं। वह चाहती थी कि रौनी उसे पूरी तरह से समझे और उनका रिश्ता हमेशा क...

"सपनों का खौफ"

  "सपनों का खौफ" Writer: Lucky Thakur यह कहानी एक छोटे से गांव के एक ऐसे लड़के की है, जिसका नाम था अर्पित। अर्पित एक बहुत ही साधारण लड़का था, जिसे किताबों और पढ़ाई में बहुत रुचि थी। उसके घर में मुश्किल से ही दो वक्त की रोटी पूरी होती थी, लेकिन वह कभी हार नहीं मानता था। वह जानता था कि उसकी मेहनत उसे किसी न किसी दिन कुछ बड़ा हासिल करने का मौका देगी। अर्पित के पास एक सपना था। वह हमेशा से ही एक डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन उसके गांव में यह सपना बहुत कठिन था, क्योंकि वहां के लोग जीवन को एक तय रास्ते पर ही चलने की सलाह देते थे। इसके बावजूद, अर्पित ने कभी अपने सपने को छोड़ने का नाम नहीं लिया। वह दिन-रात अपनी पढ़ाई में खोया रहता था और धीरे-धीरे गांव में उसका नाम भी होने लगा। एक रात, जब अर्पित अपनी किताबों में खोया हुआ था, उसने कुछ अजीब महसूस किया। अचानक, उसकी नजर कमरे की दीवार पर पड़ी, जहाँ कुछ हलचल हो रही थी। उसे लगा कि शायद यह उसकी थकान का असर है, लेकिन फिर उसने देखा कि दीवार में एक अजीब सी आकृति उभर रही थी। अर्पित घबराया, लेकिन उसने अपनी आंखों को चौड़ा करके देखा। आकृति धीरे-धीरे स्...