"रहस्यमयी किताब - भाग 2" Writer: Lucky Thakur मयंक की आँखों में अब एक नया भय और जिज्ञासा दोनों थे। उस किताब का रहस्य उसे अपनी गिरफ्त में ले चुका था, और अब वह सोचने लगा कि क्या यह सब कुछ उसकी ज़िन्दगी के साथ खेल रहा था। "तुम हो सब कुछ" के शब्द उसके दिमाग में बार-बार गूंज रहे थे। क्या इसका मतलब था कि वह अपनी ज़िन्दगी को नए सिरे से लिख सकता था? वह उसी पुराने पुस्तकालय में लौटा, जहां उसने पहली बार वह किताब पाई थी। उसे उम्मीद थी कि वह वहां कुछ और संकेत पा सकेगा, जो उसे इस किताब के बारे में और जानने में मदद कर सके। वह लाइब्रेरियन से मिला, जो अब उसे पहचानने लगा था। "तुम फिर से लौटे हो," लाइब्रेरियन ने मयंक से कहा। "क्या तुम्हें वह किताब फिर से चाहिए?" मयंक ने उसे संजीदगी से देखा और कहा, "वो किताब, जो मुझे अपने हाथों में मिली, वह कुछ खास है। क्या तुम मुझे इसके बारे में और कुछ बता सकते हो?" लाइब्रेरियन ने गहरी सांस ली और कहा, "तुमने उसे पूरी तरह से पढ़ा है, है ना?" मयंक ने धीरे से सिर हिलाया। लाइब्रेरियन की आँखों में एक चुप्पी सी छा गई...